इतिहास के पन्नों में वर्णित चंपारण का नाम ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य में ही नहीं अपितु किसानों और उनके कल्‍याण के लिए भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है। दक्षिण अफ्रीका से वापस आने के दो वर्ष बाद सन् 1917 में गांधी जी ने चंपारण का दौरा किया, जहाँ ब्रिटिश शासन द्वारा किसानों का शोषण किया जा रहा था।

अंग्रेज अधिकारियों द्वारा लगातार प्रताड़ित होने पर चंपारण के किसानों ने गांधी जी से सहायता मांगी थी। गांधी जी नागरिक अधिकार आंदोलनों के एक ऐसे प्रणेता थे जिन्‍होंने अहिंसात्‍मक प्रतिरोधों के माध्यम से दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी।

शुरू में गांधी जी ने उन किसानों की समस्‍याओं को समझने के लिए चंपारण की यात्रा की जो अंग्रेजों द्वारा थोपी गयी तिनकठिया प्रणाली की वजह से परेशानी का सामना कर रहे थे। तिनकठिया प्रणाली में किसानों को अपनी प्रत्‍येक एक बीघा जमीन में से 3 कठ्ठा जमीन पर नील की खेती करने के लिए बाध्‍य किया जाता था। जो किसान नील उगाने से इंकार करते थे उन पर अत्‍यधिक कर लगाकर उन्‍हें दंडित किया जाता था।

बाद में किसानों को अंग्रेजों के चंगुल से बचाने के लिए उन्‍होंनें ‘’चंपारण सत्‍याग्रह’’ शुरू किया। यह उनके द्वारा दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्ष गुजारने के बाद देश में छेड़े जाने वाला पहला आंदोलन था।

गांधी जी के चंपारण सत्‍याग्रह आंदोलन का परिणाम यह निकला कि बिहार की विधान परिषद में चंपारण कृषि विधेयक प्रस्‍तुत किया गया।

पिछली एक शताब्‍दी के दौरान भारत की अधिकांश आबादी यथावत कृषि पर निर्भर रही है।  कृषि क्षेत्र ने भारत की अर्थव्‍यवस्‍था में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मैं उल्‍लेख करना चाहूंगा कि आज भी देश की 54.6 प्रतिशत आबादी कृषि और उससे जुड़े हुए कार्यकलापों में कार्यरत है। इस क्षेत्र का देश के सकल मूल्‍यवर्धन में 17 प्रतिशत योगदान है। जबसे एनडीए की सरकार सता में आयी है तब से यह सरकार विभिन्‍न स्‍कीमों, तकनीकी एवं वित्‍तीय सहायता द्वारा किसानों की भलाई के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने कृषि क्षेत्र को आधुनिकीकृत एवं डिजिटल बनाने का सपना देखा हैं। इसलिए वे इस महत्‍वपूर्ण क्षेत्र की समस्‍याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

कृषि क्षेत्र में बिहार सहित अखिल भारतीय स्‍तर पर विकास कार्य की गति बढ़ा दी गई है।

चंपारण सत्‍याग्रह शताब्‍दी समारोह के अवसर पर चंपारण के कृषि विभाग में हुई कुछ प्रमुख उपलब्‍धियों का विवरण निम्‍नानुसार हैं:

  • पीपराकोठी, मोतिहारी में पशुपालन विकास केन्द्र की स्थापना की गयी।
  • राज्य में राष्ट्रीय समेकित अनुसंधान केन्द्र मोतिहारी पूर्वी चम्पारण में स्थापित किया गया।
  • मोतीपुर में केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षण संस्थान, मुंबई के अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की स्वीकृति दी गयी है।
  • पीपराकोठी, मोतिहारी में एक मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र की स्थापना भी की गयी है।
  • पीपराकोठी, मोतिहारी में गुड़ प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की गयी है।
  • महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी में स्थापित किया गया है, जिसमें कृषि संकाय की स्थापना की जाएगी।