नीली क्रांति मछुआरों के जीवन में भर रही है रंग


नीली क्रांति मछुआरों के जीवन में भर रही है रंग

आज 21 नवंबर को विश्व मात्स्यिकी दिवस है। हमारे देश में मात्स्यिकी के विकास की अपार संभावनाएं हैं और यही कारण है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मात्स्यिकी क्षेत्र में ‘नीली-क्रांति’ का आह्वान किया है। इसके अनुरूप, इस क्षेत्र की सभी योजनाओं को मिलाकर, एक छत्र योजना, ‘नीली-क्रांति’ का सृजन किया गया है। 

मात्स्यिकी भारत में कृषि तथा संबद्ध गतिविधियों का एक उभरता हुआ सेक्टर है जो पौष्टिक आहार तथा लाभकारी रोजगार प्रदान करता है तथा लगभग 15 मिलियन लोगों को आजीविका सहायता देता है। हम विश्व के अग्रणी मछली उत्पादक देश हैं और वैश्विक रूप से इसमें तथा जलकृषि सेक्टर में दूसरे स्थान पर हैं। वैश्विक रूप से मात्स्यिकी तथा जलकृषि विश्व भर में असंख्य व्यक्तियों के लिए भोजन, पोषण, आय तथा आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। 

अंतर्देशीय व समुद्री मात्स्यिकी को ‘नीली-क्रांति योजना’ मे मिलाते हुए सम्पूर्ण मात्स्यिकी सेक्टर के एकीकृत विकास को आसान और सुगम बनाया गया है। ‘नीली क्रांति’ मे विशेष रूप से जलकृषि में उन्नत तकनीकी के प्रयोग से, देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जलीय-संसाधनों से मछली-उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। 

ई.ई.जेड में मत्स्यन के लिए पूर्व में लागू की गयी “लेटर ऑफ परिमट” या “एल.ओ.पी.” व्यवस्था को जनवरी 2017 से बंद कर दिया गया है तथा पारम्परिक मछुआरों के हितों को ध्यान में रखते हुए 12 समुद्री मील के बाहर का क्षेत्र, जो भारत सरकार दवारा विनियमित होता है, उसमें विशेष प्रावधान किए गये हैं, जैसे कि मानसून के दौरान ई.ई.जेड. में लागू फिशिंग बैन से पारम्परिक मछुआरों को छूट दे दी गयी है; मत्स्यन के लिए एल.ई.डी. लाइट /अन्य कृत्रिम लाइट के प्रयोग पर तथा बुल- ट्रालिंग  या पेयर-ट्रालिंग पर हाल में ही 10 नवंम्बर,2017 को पूरी तरह से रोग लगा दी गयी है। फिशिंग बैन की अवधि को सभी तटवर्ती राज्य सरकारों से सलाह करते हुए, 47 दिन से बढ़ाकर 61 दिन किया गया है।

हमारा समग्र मछली उत्पादन लगभग 114 लाख टन है और वार्षिक विकास दर 6 प्रतिशत से अधिक है, जो आने वाले वर्षों में अपार अवसरों का द्योतक है। आप जानते है कि लगभग 67 प्रतिशत मछली उत्पादन अंतर्देशीय मात्स्यिकी सेक्टर से आता है तथा शेष 33 प्रतिशत समुद्री सेक्टर से आता है।

‘नीली क्रांति’ योजना के लिए पांच वर्षों की अवधि के लिए रु. 3000 करोड़ का केन्द्रीय बजट निर्धारित है। वर्ष 2011-14 के दौरान मछली उत्पादन 272.88 लाख टन से बढ़कर 2014-17 की तीन वर्षों की अवधि के दौरान 327.74 लाख टन हो गया जो 18.86% की वृद्धि दिखाता है।

मात्स्यिकी का एकीकृत विकास और प्रबंधन के तहत 3 माह की मत्स्यन निषेध अवधि के दौरान बचत-सह-राहत की राशि में 150% की बढ़ोतरी  करके मछुआरों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।  वर्ष 2009-10 से 2013-14 के दौरान बचत-सह-राहत की राशि रू. 600 प्रतिमाह थी जिसे वर्ष 2014-15 में बढ़ाकर रू. 900 प्रतिमाह किया गया और अब इस राशि को वर्ष 2016-17 में बढ़ाकर रू. 1500 प्रतिमाह कर दिया गया है। 
नीली क्रांति पर केंद्रीय क्षेत्र की मात्स्यिकी का समन्वित विकास एवं प्रबंधन योजना के अंतर्गत उत्तर-पूर्वी राज्यों को दी जाने वाली केंद्रीय वित्तीय सहायता को 75% से बढ़ाकर 80% किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा अन्य सामान्य  राज्यों  के लिए 50% और केंद्रशासित प्रदेश के लिए 100% की राशि दी जाती है।

दुर्घटना मृत्यु और स्थाई अपंगता के लिए बीमा कवर को रु. 1.00 लाख से बढ़ाकर रु. 2.00 लाख किया गया है। मछुआरों की वार्षिक बीमा प्रीमियम को रु. 29 से घटाकर रु. 20.35 कर दिया गया है। इस योजना को दिनांक 01.06.2017 से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में रूपांतरित करते हुए इस प्रीमियम को घटाकर रू. 12 प्रति मछुआरा कर दिया गया है। मात्स्यिकी के विकास के लिए 2014-17 के दौरान 1194.27 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई जो 2011-14 के दौरान जारी 922.06 करोड़ रुपए की राशि से अधिक है।

भारत में 30 लाख हेक्टेयर से अधिक जलाशय का क्षेत्र है, 25 लाख हेक्टयर क्षेत्र में तालाब तथा टैंक हैं एवं 12.5 लाख हेक्टेयर  खारा जल क्षेत्र मौजूद है, जिनमें लगभग 150 लाख टन की उत्पादन क्षमता है। इसी प्रकार, लगभग 20 लाख वर्ग किमी ईईजेड तथा 50 लाख वर्ग किमी महाद्वीपीय शेल्फ को कवर करते हुए लगभग 8000 किमी लंबी तट रेखा है। इन संसाधनों से भारत की अनुमानित क्षमता 44.1 लाख टन की है। 

गहन समुद्री मात्स्यिकी में विभाग ने 9 मार्च, 2017 को नीली क्रांति योजना के मौजूदा घटक समुद्री मात्स्यिकी, अवसरंचना और पोस्ट हार्वेस्ट परियोजनायों के विकास’ के तहत ‘’गहन समुद्री मत्स्यन के लिए सहायता’’ नामक उप-घटक प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत पारंपरिक मछुवारों को केंद्र-सरकार द्वारा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नौकाओं की लागत मूल्य का 50% या रु. 40 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। यह परम्परागत मछुआरों द्वारा गहन समुद्री मत्स्यन में उद्यम के लिए क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करेगा और तुलनात्मकन रूप से उच्च आय सृजन के साथ उनकी आजीविका में सहयोग भी करेगा। उप-घटक का उद्देश्य  परम्परागत मछुआरों के लिए भारतीय आर्थिक क्षेत्र, क्षेत्रीय जल के पार हमारे मछुआरों को गहन समुद्र में मत्स्यन संसाधनों के दोहन परिचालन के लिए मध्यम आकार के आधुनिक गहन समुद्री मत्य्त्नं यानों (डीएसफबी) को प्रारंभ करना है। वर्ष 2017-18 में तमिलनाडु को 200 करोड़ रूपये की राशि निर्गत की गई है। 

माननीय प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में, दिनांक 27 जुलाई, 2017 को रामेश्वरम में तमिलनाडु के पाँच मछुआरों को योजना के अन्तर्गत जारी होने वाली राशि का ‘स्वीकृति आदेश’ प्रदान कर ‘गहन समुद्री मत्स्यन के लिए सहायता’ का शुभारम्भ किया गया है। 

राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति, 2017

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने देश में समुद्री मत्स्यन के सेक्टर के सर्वांगीण विकास के लिए दिनांक 28 अप्रैल, 2017 को एक नई ‘राष्ट्रीय समुद्री मत्स्यन की नीति’ को नोटिफाई किया है। नीली क्रांति में मछुआरों के सशक्तिकरण के लिए तेजी से काम  चल रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के जैसा ही  मैदानी इलाकों में मछुआरों के घरों के लिए दी जानेवाली मदद को रु. 75 हजार से बढ़ाकर रु. 1.20 लाख और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए रु. 1.30 लाख कर दिया गया है। नीली क्रांति (मछली पालन) से मछुआरों और मछली पालन में लगे किसानों के जीवन में सकरात्मक बदलाव आ रहा है।

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