"कृषि कल्याण अभियान" में किसानों ने सीखे आय बढ़ाने के तरीके



वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 1 जून 2018 से 15 अगस्त 2018 तक देश भर में “कृषि कल्याण अभियान” चलाया गया। इस अभियान  का मुख्य उद्देश्य किसानों के खेती करने के तरीकों में सुधार लाना था, जिससे उनकी आय बढ़ाने में उनकी सहायता की जा सके। देश के 27 राज्यों के 112 आकांक्षी जिलों में से प्रत्येक के 25 गांवों में  चलाये गये इस अभियान में इन गांवो का चयन कृषि एवं किसान कल्याण ने मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा – निर्देशों के अनुसार किया गया । जिन जिलों में 1000 से अधिक आबादी वाले गांवों की संख्या 25 से कम है, वहां के सभी गांवों को  इस योजना के तहत कवर किया गया। अभियान के अंतर्गत चयनित जिलों में  कृषि और संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को उत्तम तकनीक और आय बढ़ाने के बारे में सहायता और सलाह भी दी गयी।

अभियान के सुव्यवस्थित संचालन हेतु कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के विभिन्न विभागों ने मिलकर एक कार्य योजना तैयार की है, जिसके तहत विशिष्ट गतिविधियों का चयन किया गया। इन विभागों में कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग (Department of Agriculture , Cooperation & Farmers Welfare- DAC &FW), पशुपालन, डेयरी उद्योग और मत्स्य पालन (Department of Animal Husbandry Dairying & Fisheries – DAHD & F), कृषि शोध एवं शिक्षा विभाग  (Department of Agricultural  Research & Education- DARE-ICAR ) मिलकर जिलों के 25-25 गांवों में कार्यक्रमों का संचालन किया। प्रत्येक जिले के कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा इन गांवों में कार्यक्रमों को लागू करने में अहम भूमिका निभा गयी। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक अधिकारी को कार्यक्रम की निगरानी करने एवं सहयोग करने का प्रभार दिया गया । अभियान के तहत कृषि आय बढ़ाने और खेती – बाड़ी में बेहतर पद्धतियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित  करने के मकसद से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जो निम्नलिखित हैं :

·  मृदा स्वास्थ्य कार्डों का सभी किसानों में वितरण।

·  प्रत्येक गांव में खुर और मुंह रोग (Food and Mouth Disease- FMD) से बचाव के  लिए सौ प्रतिशत बोवाइन टीकाकरण।

·  भेड़ और बकरियों में पीपीआर बीमारी (Peste des Petits ruminants - PPR) से बचाव के लिए सौ फीसदी कवरेज।

·  सभी किसानों के बीच दालों और तिलहनों की मिनी किट का वितरण।

·  प्रति परिवार पांच बागवानी/कृषि वानिकी/ बांस के पौधों का वितरण।

·  प्रत्येक गांव में 20एनएडीएपी पिट (खाद बनाने की एक विधि) बनाना।

·  कृत्रिम गर्भाधान करवाना।

·  कृषि उपकरणों का वितरण।

·  बहु-फसली कृषि के तौर- तरीकों का प्रदर्शन

"कृषि कल्याण अभियान" का मकसद किसानों तक खेती – बाड़ी से जुड़े काम की जानकारी पहुंचाना और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए उनकी मदद करना था। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें फसलों की खेती सहित बागवानी, पशुपालन, मछली पालन, मुर्गीपालन के गुर सिखाये गये  और जहां प्रशिक्षण की जरूरत थी , वहां उनके लिए प्रशिक्षण शिविर भी लगाये गये । जिनमें किसानों को सूक्ष्म सिंचाई और एकीकृत फसल के तौर – तरीकों के बारे में जानकारी दी गयी साथ ही किसानों को खेती की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराया गया । अभियान के अंतिम दिन तक सभी 112 आकांक्षी जिलों में कुल 22268 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 641121 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया ।

आईसीएआर/केवीके द्वारा प्रत्येक गांव में मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती और किचन गार्डन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गये । इन कार्यक्रमों में महिला प्रतिभागियों और किसानों को प्राथमिकता पर रखा गया । प्रशिक्षण शिविर में वैज्ञानिकों द्वारा भूमिहीन एवं घरेलू महिलाओं के लिए ऑयस्टर मशरूम को जीविकोपार्जन का बेहतर विकल्प बताया गया। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी जरूरत की पौष्टिक सब्जियां किचन गार्डेन में आसानी से उपजाई जा सकती हैं। पशुपालन वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को वैज्ञानिक विधि से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन करने के तरीके बताये गये । साथ ही किसानों को गोबर से वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद बनाने की विधि भी समझाई गयी। इन प्रशिक्षण शिविरों में काफी संख्या में किसान भाग लिया।

कृषि एवं सहभागिता विभाग के तत्वाधान में किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में बेहतर पैदावार के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया। किसानों को बताया गया  कि खेती करने से पहले मिट्टी की उर्वरा शक्ति की जांच करा लेनी चाहिए ताकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति के अनुरुप खाद का प्रयोग हो सके। साथ ही किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड के फायदे बताये गये और सॉयल हेल्थ कार्ड का वितरण भी किया गया। प्राप्त आकड़ों के अनुसार 15 अगस्त 2018 तक अभियान के दौरान कुल 694988 सॉयल हेल्थ कार्ड का वितरण किया जा चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बरकरार रखने के लिए किसानों को केंचुआ खाद का प्रयोग करना चाहिए।  शिविर के माध्यम से जिला कृषि पदाधिकारियों ने  भी किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए कंपोस्ट खाद के प्रयोग के बारे जानकारी दी। 

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