कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय किसान हित में समर्पित


कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय किसान हित में समर्पित

विगत साढ़े चार वर्षों के दौरान कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय द्वारा किसानों के हित में अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं। अब “किसान कल्‍याण” सरकार की कृषि नीति की मुख्‍य धुरी है। इसके क्रियान्‍वयन के लिए कृषि प्रक्षेत्र में रोजगारों की बढ़ोत्‍तरी तथा किसानों की आय में वृद्धि मुख्‍य आयाम हैं। इन्हें प्राप्त करने के उद्देश्य से भारत सरकार कृषि की उत्‍पादकता में वृद्धि, लागत में कमी, अधिक मूल्‍य वाली फसलों को महत्‍व देने, जोखिम न्‍यूनीकरण तथा सतत कृषि के लिए प्रयासरत है।

उपरोक्‍त ध्‍येय की प्राप्‍ति के लिए कृषि प्रक्षेत्र में जारी की जाने वाली बजटीय आवंटन में 74% की उल्‍लेखनीय वृद्धि, एसडीआरएफ आवंटन को लगभग दोगुना किए जाने के अतिरिक्‍त कॉर्पस फंड भी बनाए गए हैं यथा रु. 5 हजार करोड़ सूक्ष्‍म सिंचाई कोष, डेयरी प्रसंस्‍करण अवसंरचना कोष हेतु रु. 10,081 करोड़ का आवंटन, मत्‍स्‍य एवं जलीय विज्ञान अवसंरचना के लिए रु. 7,550 करोड़ का कोष, पशुपालन अवसंरचना के विकास के लिए रु. 2,450 करोड़ का कोष तथा ग्रामीण कृषि बाजार अवसंरचना के विकास हेतु रु. 2,000 करोड़ का कोष सम्‍मिलित है।

उपरोक्‍त वित्‍तीय प्रावधानों के साथ कई महत्‍वपूर्ण वैधानिक तथा नीतिगत सुधार भी किए गए हैं। इसमें पहली बार एक राष्‍ट्रीय मानक के आधार पर किसानों को मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड (Soil Health Card) उपलब्‍ध कराना, ई-प्‍लेटफॉर्म के माध्‍यम से किसानों को उनकी उपज के उचित मूल्‍य हेतु ई-नाम प्‍लेटफॉर्म का निर्माण किसानों के फसलों के अधिकतम जोखिम को कवर करने हेतु न्‍यूनतम प्रीमियम पर कैपिंग हटाकर Scale of Financeके अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शामिल की हैं। मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड (Soil Health Card) के साथ-साथ ऑर्गेनिक फार्मिंग के प्रोत्‍साहन हेतु परम्‍परागत कृषि विकास योजना, सतत कृषि (Sustainable Agriculture)के लिए मेढ़ पर पेड़, सूक्ष्‍म सिंचाई पर विशेष बल देतेहुए ‘Per Drop More Crop’ तथा नए अवतार में बांस मिशन (Bamboo Mission) को भी किसानों को समर्पित किया गया है।

विगत 4 वर्षों में कृषि ऋण प्रवाह में 57% इजाफा करते हुए इसे 11 लाख करोड़ तक तथा ब्‍याज सहायता को भी डेढ़ गुना करते हुए 15 हजार करोड़ तक पहुंचाया गया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मोदीसरकार के कार्यकाल में राज्‍य सरकार तथा नाबार्ड के FPO के अतिरिक्‍त SFAC द्वारा 546 FPO का गठन किया गया है। भूमिहीन किसानों के लिए 6.72 लाख से बढ़ाकर 27.49 लाख संयुक्त देयता समूह (Joint Liability Group) गठित किए गए हैं।

किसानों की आमदनी को वर्ष 2022 तक दोगुना करने के प्रयासों के अंतर्गत न सिर्फ सभी 24 फसलों के लिए अपने वायदे अनुसार MSP को लागत मूल्‍य से डेढ़ गुना किया है वरन् PSS,PSF तथा MIS योजना के माध्‍यम से लगभग 15 गुना तक की अभूतपूर्व खरीददारी भारत सरकार द्वारा की गई है।

भारतीय कृषि को बहिर्मुखी बनाने के उद्देश्‍य से न सिर्फ नई कृषि व्‍यापार नीति तैयार की गई है वरन् मोदी सरकार के विभिन्‍न प्रयासों के फलस्‍वरूप समुद्री उत्‍पाद के निर्यात मूल्‍य में 95%, चावल में 84%, ताजे फलों (Fresh Fruits)में 77%, ताजे सब्‍जियों (Fresh Vegetables) में 43% तथा मसालों (Spices) में 38% की वृद्धि दर्ज की गई है। 

समय-समय पर किसान हित में तिलहन तथा दलहन पर आयात शुल्‍क मात्रात्‍मक रोक के माध्‍यम से किसान हितों की भी रक्षा की गई है।

वैधानिक सुधारों में इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग लागू करने के लिए APMC Act में जरूरी संशोधन किए गए हैं। इसके अतिरिक्‍त, नए APLM Act, लैंड लीजिंग एक्‍ट तथा कॉन्‍ट्रैक्‍ट फार्मिंग एवं सर्विसेज एक्‍ट को राज्‍यों को लागू करने हेतु निर्गत किया गया है।

कृषि अनुसंधान प्रक्षेत्र में किसानों की उत्पादकता तथा आय बढ़ाने के उद्देश्‍य से 795 नई फसलें किसानों को जारी की गई है, जिसमें न सिर्फ बायोफोर्टिफिकेशन वरन् जलवायु सहनशीलता के भी गुण सम्‍मिलित किए गए हैं। कृषि तथा पशुचिकित्सा (Veterinary) शिक्षा हेतु नए कॉलेजों की स्थापना, सीटों में वृद्धि, अन्‍य अनुभवजन्‍य स्‍थापित इकाइयों की शुरूआत तथा छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्‍ति (Stipends) राशि में भी वृद्धि की गई है। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों तथा किसानों के बीच अधिक समन्‍वय हेतु “फार्मर फर्स्‍ट”,“मेरा गांव मेरा गौरव” तथा “आर्या” जैसी योजनाओं का सृजन किया गया है।

फसलों के साथ-साथ बागवानी (Horticulture)तथा कृषि संबद्ध प्रक्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान दिया गया है। भारतीय जलवायु के अनुकूल देशी गोवंश के संवर्धन के लिए राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन, सेक्‍स सोर्टेड सीमेन जैसी तकनीक तथा डेयरी अवसंरचना के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। मात्‍स्‍यिकी क्षेत्र में नीली क्रांति (Blue Revolution) क्षत्रक योजना के माध्‍यम से अन्तर्देशीय तथा समुद्री मात्‍स्‍यिकी के विभिन्‍न आयामों पर तथा मत्‍स्‍य अवसंरचना विकास पर विशेष बल दिया गया है। इसके साथ ही समेकित मधुमक्खीपालन विकास केंद्र(Integrated Beekeeping Development Centre) के माध्‍यम से मधुमक्खीपालन को किसानों की आय का एक अन्‍य स्रोत के रूप में विकसित किया गया है।

उपरोक्‍त योजनाओं एवं पहलुओं की सार्थकता तथा सफलता इस बात से परिलक्षित होती है कि वर्ष 2017-18 में अब तक का रिकॉर्ड खाद्यान्‍न उत्‍पादन 284.83 मिलियन टन, रिकॉर्ड बागवानी उत्‍पादन 306.82 मिलियन टन, दलहन के उत्‍पादन में 40% की बढ़त के साथ 25.23 मिलियन टन पहुंच गया है।

कृषि मंत्रालय माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में निर्धारित किए गए सात सूत्रीय रणनीति जिनकी सिफारिश डॉ. स्‍वामीनाथन जी ने भी की थी जिसका क्रियान्‍वयन मोदी सरकार के कार्यकाल में हो रहा है- जैसे “प्रति बूंद अधिक फसल”, प्रत्‍येक खेत की मिट्टी गुणवत्‍ता के आधार पर पोषक तत्‍वों का प्रावधान, कटाई के बाद फसल नुकसान को रोकने के लिए गोदामों और कोल्‍डचेन में निवेश, खाद्य प्रसंस्‍करण के माध्‍यम से मूल्‍य संवर्धन को प्रोत्‍साहन, राष्‍ट्रीय कृषि बाजार– ई-नाम, जोखिम न्‍यूनीकरण के लिए फसल बीमा, कृषि संबद्ध क्षेत्र यथा डेयरी-पशुपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्‍खीपालन, मेढ़ पर पेड़, बागवानी तथा मत्‍स्‍यपालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना प्राथमिकता है। 

कृषि उपज के प्रसंस्‍करण हेतु टॉप्‍स योजना के माध्‍यम से आलू, प्‍याज तथा टमाटर के क्‍लस्‍टर स्‍थापित किए जाएंगे। नए एग्री स्‍टार्ट-अप, एग्री एंटरप्रेन्योर को बढ़ावा दिया जाएगा। 22 हजार ग्रामीण हाटों के अवसंरचना हेतु भी आवश्‍यक कदम उठाए जाएंगे। भण्‍डारण तथा वेयरहाउस प्रक्षेत्र को गति प्रदान की जाएगी तथा किसानों को प्राइस एवं डिमांड फोरकास्‍टिंग के आधार पर किस फसल को उगाने में किसानों को फायदा मिलेगा, पर विशेष बल दिया जाएगा।  

मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि भारत सरकार के इन प्रयासों से किसानों की आमदनी को वर्ष 2022 तक दोगुना करने में सफल होंगे।

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