किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उद्यमशीलता और स्टासर्ट-अप


किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उद्यमशीलता और स्टासर्ट-अप

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में पारंपरिक रूप से प्रौद्योगिकी विकास और प्रसार में मुख्‍य बल खाद्य और पौषणिक सुरक्षा उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से फसल, पशु और फार्म उत्‍पादकता को बढ़ाने पर दिया जाता रहा है। इस प्रकार विकसित की गई प्रौद्योगिकियों ने खाद्यान्‍न, बागवानी फसलों, दूध, मात्स्यिकी और अंडों के उत्‍पादन को बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण रूप से योगदान दिया है। तथापि, कृषि के बढ़ रहे वैश्वीकरण के कारण, अब अनुसंधान और विकास की प्राथमिकताओं का कृषि उत्‍पादों के मूल्‍य संवर्धन और कृषि वैविधीकरण को बढ़ाने की ओर पुन:अभिविन्‍यास किया जाना चाहिए, और इसके द्वारा ही वास्‍तविक समानता और आजीविका सुरक्षा उपलब्‍ध कराई जा सकेगी।

भारतीय स्‍टार्ट-अप पारिस्थितिकीय प्रणाली ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विकास का प्रदर्शन किया है; और अब भारत वैश्विक रूप से स्‍थापित किए जाने वाले स्‍टार्ट-अप की संख्‍या के संदर्भ में सर्वोच्‍च तीन देशों में से एक देश के रूप में उभरा है। तथापि, सभी देशों के स्‍टार्ट-अप पारिस्थितिकी प्रणाली के सैक्‍टरवार ब्रेक-अप से यह पता चलता है कि कृषि क्षेत्र की ओर विभिन्‍न स्‍टेकहोल्‍डरों, विशेष रूप से निवेशकों, का ध्‍यान कम जाता रहा है। इसके मुख्‍य कारण उच्‍चतर जोखिम, जलवायु जोखिम, कृषि भूमि का उच्‍च मात्रा में विखण्‍डीकरण,आंकड़ो की कमी, सप्‍लाई श्रृंखला में पारदर्शिता की कमी आदि हैं। तथापि, भारतीय कृषि में एक मुख्‍य बदलाव देखा गया है जिससे पता चलता है कि किसानों की विचारधारा में अब परिवर्तन होने लगा है और ऐसा सरकार की उद्यमशीलता विकास को प्रोत्‍साहित करने और स्‍टार्ट-अप को सहायता प्रदान करने की नीति में परिवर्तन के कारण संभव हुआ है। केन्‍द्र सरकार द्वारा गैर नीतिगत उपायों जैसे कि राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर नीति 2016) और स्‍टार्ट-अप इंडिया (2016) की शुरूआत करने से संगठनों में अनुसंधान और विकास में नव प्रर्वतनों के एक कल्‍चर का निर्माण हुआ है जो उद्योग-शिक्षाविदों के बीच सहभागिताओं को प्रोत्‍साहित करते हैं। इसके साथ-साथ, इन पहलों से प्रक्रियाएं और हैंड होल्डिंग सरल हुई हैं; निधियन की सहायता प्राप्‍त हुई हैं और प्रौद्योगिकियों को कृषि व्‍यवसाय में रूपांतरित करने में बढ़ावा देने के लिए की जाने वाली पहलों को भी प्रोत्‍साहित किया जा रहा है।

इसलिए, पिछले कुछ वर्षों में अनेक शिक्षित युवा, जिनके पास नए विचार हैं, काम करने का जोश है, कृषि को उसके पारंपरिक रूप से ऊपर उठाकर हाईटैक व्‍यवसाय मॉडलों और नई प्रकार की प्रौद्योगिकियों की शुरूआत करने की ओर आकर्षित हुए हैं। ये उद्यमी और स्‍टार्ट-अप कृषि मूल्‍य श्रृंखला में लुप्‍त हो चुके सम्‍पर्क उपलब्‍ध करा सकते हैं और किसानों और ग्राहकों दोनों को उत्‍पादों, प्रौद्योगिकियों और सेवाओं की त्‍वरित और दक्ष डिलीवरी कर सकते हैं। खाद्य और कृषि क्षेत्र में आईसीटी-एप्‍पस से फार्म ओटोमेशन, स्‍मार्ट पोल्‍ट्री और डेयरी उद्योगों से स्‍मार्ट कृषि की ओर तथा संरक्षित कृषि से नवोन्‍मेषी खाद्य प्रसंस्‍करण और पैकेजिंग की ओर प्रौद्योगिकी प्रेरित स्‍टार्ट-अप उभर रहे हैं।

नई प्रौद्योगिकियों के साथ नए स्‍टार्ट-अप बनाने के अलावा, यह उतना ही महत्‍वपूर्ण है कि हमारे देश में बहुत बड़ी संख्‍या मेंछोटे पैमाने के किसान उसी रूप में उद्यमी बन सकें जैसी कि वे खेती करते हैं। तथापि, इन किसानों के लिए यह चुनौती है और इसके लिए उन्‍हें प्रसार कार्यकर्ताओं और अन्‍य संस्‍थानों की सहायता की आवश्‍यकता है। उन्‍हें एक बेहतर और अधिक दक्ष और लाभप्रद रास्‍ते बताए जाने चाहिए जिससे कि वे अपने खेतों से अधिकतम लाभ प्राप्‍त कर सकें।

इस प्रकार, उद्यमशीलता विकास के माध्‍यम से कृषि में नव-प्रवर्तन लाने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी प्रणाली का निर्माण करने के लिए प्रौद्योगिकी इनक्‍यूबेशन और स्‍टार्ट-अप को बढ़ावा देना ऐसे उपाय हैं जिनसे देश के किसानों के जीवन में सुधार लाया जा सकता है। भारत के माननीय प्रधान मंत्री द्वारा परिकल्पित किए गए वर्ष 2022 तक ''किसानों की आय को दोगुना करने'' के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में यह एक महत्‍वपूर्ण कदम होगा।

सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं के अनुरूप, भा.कृ.अ.प. ने विभिन्‍न वर्गों के स्‍टेकहोल्‍डरों को शामिल करते हुए कृषि क्षेत्र में उद्यमियों और स्‍टार्ट-अप को विकसित करने के लिए संकेन्द्रित प्रयास किए हैं।

इस बात पर बल दिया गया है कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृषि से संबंधित गतिविधियां बाजार-प्रेरित वाणिज्यिक उद्यम के रूप में की जानी चाहिए। इसका अनिवार्य रूप से अर्थ यह है कि उनमें नई फसलें और किस्‍में उगाने की क्षमता हो, उन्‍नत पशुधन का प्रजनन कर सकते हों और उनके पास उत्‍पादकता और उत्‍पाद विविधीकरण को बढ़ाने के लिए वैकल्पिक प्रौद्योगिकियां हों; और इसके द्वारा जोखिम कम होंगे और लाभ बढ़ेंगे।

कृषि में दक्षता विकास के लिए

बढ़ती कार्यबल आवश्‍यकताओं के लिए नियोजनीय कौशल प्रदान करने की सुविधाएं प्रदान करने वाली उचित पारिस्थितिकी तंत्र को बनाने की आवश्‍यकता महसूस करते हुए कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय ने दिनांक 20 मार्च, 2018 को कृषि एवं संबंध क्षेत्रों में कैशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ एक एमएयू हस्‍ताक्षर किया है।

देश के कृषि विकास में ग्रामीण युवाओं के बीच उद्यमी कौशल विकसित करने के महत्‍व को समझते हुए भाकृअप ने युवाओं को कृषि में आकर्षित करने एवं बनाए रखने के लिए (एआरवाईए) कार्यक्रम प्रारंभ किया है।

नई प्रौद्योगिकियों में उद्यमशीलता और स्‍टार्ट-अप:

किसानों की नई प्रौद्योगिकियों तक पहुंच की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए नए उद्यमियों और स्‍टार्ट-अप को विकसित करने की नई एप्रोच को पूर्व आवश्‍यकता मानते हुए, भा.कृ.अ.प. ने आईपी और प्रौद्योगिकी व्‍यावसायीकरण प्रक्रिया के प्रचार में प्रबंधक की भूमिका निभाने का कार्य किया है। परिणामस्‍वरूप, नीति और परिचालनात्‍मक दिशानिर्देश बनाए गए और भा.कृ.अ.प. के सभी संस्‍थानों में तीन स्‍तरों की नियमन क्रियाविधि की स्‍थापना की गई।

उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम (ईडीपी): युवा स्‍कॉलरों, उद्यमियों और प्रगतिशील किसानों के बीच कृषि व्‍यवसाय विकास गतिविधियों के बारे में जागरूकता उत्‍पन्‍न करने के लिए, भा.कृ.अ.प. संस्‍थानों ने संस्‍थान/जोनल/राष्‍ट्रीय स्‍तर पर विभिन्‍न कृषि व्‍यवसाय संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन किया है। वर्ष 2009-10 से 2015-16 तक भा.कृ.अ.प. के विभिन्‍न  संस्‍थानों में ऐसे 108 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उत्‍साहजनक सरकारी नीतियों और एनएआईएफ के तहत की गई पहलों के कारण 2016-17 से 2018-19 में 278 उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम आयोजित किए गए। 

भाकृअप द्वारा नवीन स्‍टार्ट-अप: कृषि व्‍यापार उद्यमों के विकास पर विशेष जोर देते हुए  एबीआई केन्‍द्रों ने अपनी कृषि प्रसार संबंधी तकनीकी तथा बुनियादी जरूरतों के लिए पिछले तीन वर्षों (2016-17 से 2018-19) में 662 इन्‍क्‍यूबेट/ उद्यमियों /स्‍टार्ट-अप को सहायता प्रदान की है। इस अवधि के दौरान भाकृअप के एबीआई नैटवर्क ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में अपना व्‍यापार प्रारंभ करने के लिए 385 उद्यमियों /स्‍टार्ट-अप को स्‍नातक/प्रशिक्षित किया है।

भाकृअप द्वारा स्‍टार्ट-अप में सहायता की सफलता की गाथा को ‘AgRIM’ ‘एग्री-स्‍टार्ट-अप: रिफलैक्‍शन आफ आईसीएआर टैक्‍नोलॉजी इन मार्किट’ नामक पुस्‍तक में प्रकाशित किया है। जिन क्षेत्रों में इन स्‍टार्ट-अप को स्‍थापित किया गया है उनमें कृषि अभियांत्रिकी मशीन/उपकरण, जैव-नाशीजीवनाशक तथा फसल पोषण, फसल उत्‍पादन तथा उत्‍पादन प्रक्रिया, मत्‍स्‍य उत्‍पाद तथा प्रसंस्‍करण, खाद्य उत्‍पाद और प्रसंस्‍करण, बीज एवं रोपण सामग्री तथा वस्‍त्र उद्योग शामिल हैं। यह पाया गया कि 2008-09 से 2013-14 के दौरान 21 स्‍टार्ट-अप ने अपने व्‍यापारिक कार्यकलाप प्रारंभ किए। तथापि वर्ष 2017-18 के दौरान इस रूझान में वृद्धि हुई और 84 नए स्‍टार्ट-अप बाजार में आए।

छात्रों में उद्यमशीलता के विकास हेतु

स्‍टूडेंट रेडी (ग्रामीण उद्यमशीलता जागरूकता विकास योजना) यह भाकृअनुप की एक नई पहल है जो कृषि और संबंध विषयों के स्‍नातकों को अभिमुख करता है जो गहन कृषि ज्ञान चुनौती के लिए सुनिश्चित करना और रोजगार योग्‍यता का भरोसा दिलाना और उद्यमी विकसित करने के लिए है। सभी कृषि विश्‍वविद्यालयों में इस कार्यक्रम को डिग्री एवार्ड के लिए अनिवार्य शर्त के रूप में लागू करने का विचार संबंधित विषय और स्‍थानीय मांगों की आवश्‍यकताओं पर निर्भर करता है, जो अनुभवी हाथों और व्‍यवहारिक प्रशिक्षण को सुनिश्चित करें।

कार्यक्रम में पांच संघटक शामिल हैं, नामत: प्रयोगात्‍मक सीख, ग्रामीण जागरूकता कार्य अनुभव, संयंत्र प्रशिक्षण/औद्योगिक लगाव, प्रशिक्षित हाथ/दक्षता विकास प्रशिक्षण और छात्र परियोजनाएं। ये सभी संघटक एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और परियोजना विकास तथा अमल, निणर्य करने, व्‍यक्तिगत और दल समन्‍वय, समस्‍या समाधान के लिए ए्प्रोच करने, जिम्‍मेदारी, गुणवत्‍ता नियंत्रण, विपणन और एक सिरे से दूसरे सिरे तक विरोधों को सुलझाने  हेतु दक्षता निर्माण की अवधारणा है।

प्रयोगात्‍मक सीख छात्र तैयार कार्यक्रम का एक प्रमुख संघटक है जो छात्रों को अपना स्‍वयं का उद्यम शुरू करने हेतु प्रतिस्‍पर्धा, योग्‍यता, क्षमता निर्माण, दक्षता, विशेषज्ञता और आत्‍मनिर्भरता का विकास करने में सहायता करता है और नौकरी मांगने वाले के बदले नौकरी देने वाला बनने और सीखने के दौरान अर्जित करने की अवधारणा की ओर एक कदम है।

अब तक विभिन्‍न विषयों में 441 प्रयोगात्‍मक सीख इकाईयों की स्‍वीकृति हो चुकी है। यह कार्यक्रम 2016-17 और 2017-18 के दौरान क्रमश: 51 और 55 कृषि विश्‍व-विद्यालयों में शुरू किया गया और इस कार्यक्रम से 26,000 से ज्‍यादा छात्रों को लाभ हुआ है। इसने कृषि छात्रों को यह मौका दिया कि वे कृषि कार्य की गतिविधियों का अनुभव लें और गंभीरता से अपने कार्य अनुभव की समीक्षा और विश्‍लेषण करें। संबंधित संस्‍थानों और उद्योगों में कार्य करके व्‍यावसायिकता विकास हेतु मौका प्राप्‍त करने के लिए विभिन्‍न संगठनों में व्‍यवहारिक प्रदर्शन आत्‍मनिर्भरता प्राप्‍त करने और नए रोजगार अवसरों को फैलाने का मौका प्रदान करता है। छात्रों को प्रतिमाह 3000/- रूपये प्रति छात्र अधिकतम छ: माह तक सहायता भी प्रदान की जाती है।

ग्रामीण जागरूकता कार्य अनुभव (आरएडब्‍ल्‍यूई) छात्रों को मुख्‍यत: ग्रामीण क्षेत्र में कुल मिलाकर विकास के लिए ग्रामीण स्थितियों, किसानों द्वारा अपनाई गई प्रौद्योगिकियों की स्थिति, किसानों की समस्‍याओं की प्राथमिकता और कृषि परिवारों के साथ कार्य करने का नजरिया और दक्षता विकास को समझाने में सहायता करता है।

इसके अलावा, भाकृअनुप-नार्म नियमित रूप से छात्रों, उद्यमियों और शैक्षणिक समुदाय के लिए एक दिवसीय सुग्राही बनाने के कार्यक्रमों का आयोजन करता है। अब तक इस प्रकार की 14 कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं जहां देश भर से 15 विश्‍वविद्यालयों से भी ज्‍यादा को शामिल करते हुए करीब 2000 छात्रों और लगभग 500 उद्यमियों ने भाग लिया है। 

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