खरीफ की फसलों के साथ किसानों के घर लौटेंगी खुशियां


खरीफ की फसलों के साथ किसानों के घर लौटेंगी खुशियां

देश भर के ज्यादातर हिस्सों में खरीफ की बुआई अब अपने अंतिम चरण में है बल्कि कई राज्यों में बुआई का काम पूरा हो चुका है। इस बार बारिश अच्छी हुई है इसलिए खरीफ की बुआई को लेकर किसानों में काफी उत्साहित हैं। देश के कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति भी है और किसान परेशान हैं, लेकिन केन्द्र सरकार इन राज्यों को हर संभव मदद दे रही है और नुक्सान की रिपोर्ट मिलने के बाद इन राज्यों को और मदद दी जाएगी। मुझे उम्मीद है कि धीरे – धीरे वहां स्थिति सामान्य हो जाएगी। 

पिछले दो वर्षों में देश में सूखे जैसी स्थिति थी जिसकी वजह से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बार स्थितियां किसानों के अनुकूल है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ सहित बुंदेलखंड में भी अच्छी बारिश हुई है। 

आप सब जानते हैं, हमारे यहां फसलों के दो मौसम हैं- एक खरीफ और दूसरा रबी। खरीफ की बुआई मानसून की बारिश के बाद जुलाई – अगस्त में होती है और नवंबर- दिसंबर में ये फसल काट ली जाती है। रबि की बुआई, नवंबर – दिसंबर में होती है और मार्च – अप्रैल में फसल तैयार हो जाती है। 

खरीफ में मोटे तौर पर धान, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की बुआई होती है। दलहन में मुख्य रूप से अरहर, मूंग, उड़द और कुल्थी के दालों की बुआई की जाती है। मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, स्माल मिलेट्स और मक्का बोया जाता है। सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, रामतिल, अरंडी, गन्ना, नाइजर, जूट, मेस्टा और कपास भी खरीफ में ही उगाया जाता है।

राज्यों से 26 अगस्त तक की खरीफ बुआई की रिपोर्ट आ गयी है। मुझे इस बात की खुशी है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा क्षेत्र में खरीफ की बुआई हुई है। तक देश में 1019.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई खरीफ की बुवाई हो चुकी थी। पिछले वर्ष यानी 2015-16 में 973.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुआई हुई थी। इस बार धान का रकबा भी बढ़ा है। पिछले वर्ष के 352.23 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 363.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई हुई है।

जैसा कि आपको मालूम है कि हाल के दिनों में दाल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। लोग परेशान थे। सूखे और अन्य प्राकृतिक कारणों की वजह से पिछले दो साल में दलहन की पैदावार कम हुई थी जिसका जमाखोरों ने फायदा उठाया। केन्द्र सरकार ने दालों की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए उपाय किए और अब दालों की कीमते काफी नीचे आ गयी हैं। 
अच्छी बात यह है कि इस बार किसानों ने पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना ज्यादा क्षेत्र में दलहन की बुआई की है। राज्यों से मिली जानकारी के अनुसार 139.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दाल की बुआई हो चुकी है और इसमें और बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। यहां आपको यह बता देना ठीक रहेगा कि कृषि मंत्रालय ने दलहन की पैदावार बढ़ाने की कई योजनाएं शुरू की हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में देश में दालों की कोई कमी नहीं होगी। 

इस बार तिलहन में भी बुआई का रकबा बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में 177.74 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई है जबकि 2015-16 में 174.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की बुवाई  हुई थी। इस बार खरीफ की फसलों के साथ एक अच्छी बात यह रही कि देश के ज्यादातर राज्यों ने खरीफ की फसलों के लिए अपने – अपने यहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की। किसानों के लिए ये काफी राहत भरा काम है। अब उन्हें अपनी फसलों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।  कुछ दिनों में देश भर में खरीफ की बुआई का काम पूरा हो जाएगा। हम आशा करते हैं कि इस बार खरीफ की फसलें अच्छी होगीं और जब ये फसलें कटकर किसानों के घरों में आएंगी तो वहां खुशियों के दीपक जलेंगे।

 

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