बेहतर हो रही है किसानों के खेतों की मिट्टी, सॉयल हैल्थ कार्ड योजना से सुधर रहा है खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य।


बेहतर हो रही है किसानों के खेतों की मिट्टी, सॉयल हैल्थ कार्ड योजना से सुधर रहा है खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य।

5 दिसम्बर को दुनिया भर में विश्व सॉयल दिवस मनाया गया। भारत में भी कृषि जगत में  इसकी धूम रही। इस अवसर पर सॉयल हैल्थ के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए सभी जिलों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आपको बता दें कि  केन्द्र सरकार किसानों के खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारने के लिए सॉयल हैल्थ कार्ड योजना लेकर आयी है जिसके तहत खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारने के लिए युद्द स्तर पर काम किया जा रहा है।

हम सब अपनी और अपने प्रियजनों की सेहत का ख्याल रखते हैं। छोटी सी भी स्वास्थ्य समस्या होने पर हम तुरंत डॉक्टर के पास जांच व इलाज कराने जाते हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे शरीर में सभी पोषक तत्व अनुकूलतम स्तर पर हो और हम उनकी कमी को आवश्यक पोषक तत्वों से पूरा करने का प्रयास करते हैं। लेकिन हम में से ऐसे कितने लोग हैं जो वास्तव में धरती मां की सेहत का ख्याल रखते हैं जो हमें भोजन प्रदान करती है। आप इस बात पर मुझसे सहमत होंगे कि यदि धरती मां स्वस्थ होंगी तो हमें पौष्टिक आहार मिलेगा जिससे देश के लोगों का अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित होगा। मिट्टी में किसी भी पोषक तत्व की कमी होने का मतलब है कि हमारे भोजन में भी पोषक तत्वों की कमी हो रही है।

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सॉयल हैल्थ कार्ड योजना की शुरुआत फरवरी, 2015 में राजस्थान में की गई थी। इसका उद्देश्य देश के सभी किसानों की 12 करोड़ जोतों के सॉयल  हैल्थ के विषय में जानकारी देना है। सॉयल हैल्थ कार्ड किसानों को मिट्टी की पोषक तत्व संबंधित स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करता है और साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य व उर्वरता में सुधार करने के लिए उचित मात्रा में उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की सलाह देता है। सॉयल हैल्थ कार्ड से यह भी पता लगता है कि खेत में कौन सी फसल लगाना अच्छा रहेगा। हर दो साल में मिट्टी की स्थिति का आकलन होता है ताकि पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सके और इसमें जरूरी सुधार किया जा सके। असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग के कारण भी धरती माँ बीमार पड़ जाती है और उत्पादन क्षमता कम होने लगती है। दरअसल खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा रखने के चौतरफा लाभ है। इससे खेती की लागत में कमी आती है, फसलों की उत्पादकता बढ़ती है। मिट्टी के हिसाब से फसले उगाने की वजह से किसानों को आर्थिक लाभ होता है। वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में सॉयल हैल्थ कार्ड स्कीम की अहम भूमिका है।  माननीय प्रधान मंत्री जी ने हाल में मन की बात में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को उजागर किया और 27 नवंबर, 2017 को मन की बात में मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए किसानों को सलाह दी।

सॉयल हेल्थ कार्ड की प्रमुख विशेषताओं में नमूने एकत्र करने एवं प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए एकसमान दृष्टिकोण अपनाना, देश में सारी भूमि को कवर करना और हर दो वर्ष में सॉयल हैल्थ कार्ड जारी करना शामिल हैं। यह योजना राज्य सरकारों के सहयोग से चल रही है। मिट्टी में होने वाले परिवर्तनों को मॉनिटर करने और इनकी तुलना पिछले वर्षों से करने के लिए एक पद्धतिबद्ध डाटाबेस तैयार करने वास्ते जीपीएस आधारित मिट्टी नमूना संग्रहण को अनिवार्य कर दिया गया है। नमूनों के ऑनलाइन पंजीकरण और परीक्षण परिणामों को सॉयल हैल्थ कार्ड के राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। परीक्षण के परिणामों के आधार पर इस सिस्टम द्वारा स्वतः ही सिफारिशों की गणना की जाती है। सॉयल हैल्थ कार्ड 14 स्थानीय भाषाओं में तैयार किया जाता है और किसानों को वितरित किया जाता है। मुझे इस बात की खुशी है कि स्थानीय बोली में सॉयल हैल्थ कार्ड तैयार करने का कार्य भी शुरू हो चुका है। अब सॉयल हैल्थ कार्ड कुमाऊनी, गढ़वाली, खासी, गारो जैसी- स्थानीय बोलियों में भी तैयार किए जा सकते हैं। कार्ड में दी गई सलाह के अनुसार किसान अपने खेतों में पोषक तत्वों का उपयोग करे ऐसा संकल्प हम सबों को लेना है जिससे खेती की लागत में कमी आएगी, उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि होगी। सॉयल हैल्थ कार्ड पोर्टल को अब समेकित उर्वरक प्रबंधन सिस्टम (आई-एफएमएस) से जोड़ दिया गया है और सॉयल हैल्थ कार्ड सिफारिश के अनुसार उर्वरकों के वितरण का कार्य पॉयलेट आधार पर 16 जिलों में शुरू कर दिया गया है।

नेशनल प्रोडक्टविटी काउंसिल द्वारा किए गये एक अध्ययन में पाया गया है कि सॉयल हैल्थ कार्ड्स के अनुसार खेत में खाद आदि डालने पर रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में 8 से 10 प्रतिशत की कमी आयी। सॉयल हैल्थ कार्डस के हिसाब से खेत में रासायनिक उर्वरक डालने से उपज में 5 से 6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी पाई गई। 21 राज्यों के 171 जिले के किसानों से मिले फीडबैक में पाया गया कि सॉयल हैल्थ कार्ड के इस्तेमाल से यूरिया के इस्तेमाल में कमी हुई जिससे खेती की लागत में कमी आयी।​

मिट्टी के स्वास्थ्य कार्ड की प्रगति की बात करें तो प्रथम चरण (2015 से 2017) में 12/12/2017 तक 9.89 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। हमारा लक्ष्य दिसंबर, 2017 के अंत तक सभी 12 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करना है। इस योजना का दूसरा चरण, 1 मई 2017 से शुरु हुआ और वर्ष 2017-19 तक चलेगा। हर दो साल में मृदा की स्थिति का आकलन किया जाएगा ताकि पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सके और सुधार किया जा सके।

माननीय प्रधान मंत्री जी ने हाल में मन की बात में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को उजागर किया और 27 नवंबर, 2017 को मन की बात में मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए किसानों को सलाह दी।

सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड ऐप भी लांच किया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर एक ऐप क्षेत्र स्तर के कार्य कर्ताओं के लाभ के लिए बनाया गया है। ऐप नमूना पंजीकरण की सुविधा प्रदान करेगा, फ़ील्ड स्तर पर अक्षांश और देशांतर के साथ परीक्षण के परिणामों को शामिल करेगा। यह उस स्थान / भू-निर्देशांक के बारे में सही जानकारी पर कब्जा करेगा जहां से मिटटी का नमूना एकत्र किया जाता है।

विश्व मृदा दिवस के अवसर पर, राज्य स्तर पर कृषि कार्यक्रम, कृषि विकास  केंद्रों पर कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गयी ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैल सके। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, कृषि विभाग, भारत सरकार के साथ काम कर रहा है, कॉर्पोरेट सोशल ज़िम्मेदारी के तहत मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए डिस्टिक्ट / ब्लॉक स्तर पर प्रचार कर रहा है, उर्वरक बिक्री की फुटकर दुकानों पर पोस्टर के माध्यम से, देश भर के किसान के बीच इसके प्रचार का काम हो रहा है।

कृषि मंत्रालय ने इस योजना के बारे में किसानों को जानकारी देने के लिए मीडिया अभियान भी चलाया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड का मीडिया अभियान, 4 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस की पूर्व संध्या पर होर्डिंग्स, विज्ञापन और ऑन-लाइन प्लेज कैम्पेन के माध्यम से शुरू हुआ। मिट्टी के स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबंधित क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य की देखभाल के लिए शपथ लेने के लिए सभी संसद सदस्यों को पत्र लिखे गए  हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अर्थात माई गोव  मंच, जागरूकता निर्माण गतिविधियों (प्रश्नोत्तरी, पेंटिंग, प्रतिज्ञा, लघु फिल्में) कराई  गयी  हैं। इसके साथ ही, विभिन्न कार्यों का आयोजन राज्य सरकारों और आईसीएआर, इसके संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा किए गये।

मैं, देश के सभी किसानों से अनुरोध करता हूं कि वे बड़ी संख्या में इन आयोजनों में शामिल हों और सॉयल हैल्थ कार्ड योजना का पूरा लाभ प्राप्त करें।

अंत में मैं, अपने मित्रों – विशेषकर: छोटे कस्बों, शहरों के युवाओं से अनुरोध करता हूं कि वे अपने खाली समय में देश में सॉयल परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता उत्पन्न करें। मैं देश के हर नागरिक से अनुरोध करता हूं कि वे यह प्रतिज्ञा लें कि वे अपने गांव के आस-पास के क्षेत्र में 10 किसानों को सॉयल परीक्षण आधारित पोषक तत्वों के बारे में जागरूक करेंगें। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके सहयोग से सॉयल परीक्षण आधारित पोषक तत्वों के उपयोग संबंधी प्रचार-प्रसार को जन-अभियान के रुप में पूरे देश में संचालित किया जा सकता है।

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