अटल जी की मोतिहारी जेल यात्रा का एक संस्मरण..........


अटल जी की मोतिहारी जेल यात्रा का एक संस्मरण..........

बात 1974 आंदोलन के इतिहास के पन्‍नों में अब दब चुकी है। 74 के छात्र युवा आंदोलन की चर्चा शुरू होते ही पूर्व के छात्र नेतागण और आज के राजनेता अपनी-अपनी यादों को ताजा करने लगते हैं। इसी आंदोलन की बड़ी घटनाओं मेंएक घटना पूर्व प्रधानमंत्री, उस समय के प्रखर सांसद तथाभारतीय जनसंघ के नेता,लोकप्रिय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की मोतिहारी में गिरफ्तार किए जाने तथा जेल भेजे जाने की है।

उस समय सरकार के विरूद्ध विद्यार्थियों तथा युवकों में असंतोष बढ़ चुका था। अराजकता, सरकारी दफ्तरों में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार तथा मनमानी, बस भाड़े में बढ़ोतरी, विद्यार्थियों को निजी बसों में मिल रही छूट पर रोक तथा आवश्‍यक सामग्रियों की कालाबाजारी से उबकर छात्र आंदोलन की राह पर आ गए थे। 26 फरवरी, 1974 को छात्र संघर्ष समिति के आंदोलनकारियों ने चम्‍पारण में बंद का आह्वान कर बस परिचालक को कैद कर दिया था। पुलिस ने दमनात्‍मक कार्यवाई कर छात्रों को पीटा तथा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मोतिहारी के इस छात्र आंदोलन का असर बेतिया, मुजफ्फरपुर तथा पटना में भी देखा जाने लगा। मोतिहारी सहित सभी नगरों में छात्र संघर्ष समिति तथा जनसंघर्ष समितियां गठित हो गई थी। वह स्‍वस्‍फूर्त आंदोलन आग की लपटों की तरह फैलना शुरू हो गया था। लक्ष्‍य था- ईमानदार सरकार बनाना।

2 मार्च, 1774 को छात्र संघर्षसमिति की बैठक मोतिहारी में आयोजित की गई जिसमें अपनी मांगों के समर्थन में क्रमबद्ध आंदोलन चलाने का सर्वसम्‍मत फैसला हुआ। उस समय जिले में प्रजासमाजवादीपार्टी, संयुक्‍त समाजवादी पार्टी,संगठन कांग्रेस तथा भारतीय जनसंघ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मुख्‍य रूप से सक्रिय थे तथा राज्‍य एवं देश में कांग्रेस की सरकारें थी। मैं छात्र जीवन में ही 1969 में जनसंघ के काम में जुड़ गया था एवं 1970 में जनसंघ का पूर्णकालिक संगठन मंत्री बन गया था।

स्‍वतंत्रता आंदोलन के बाद युवा शक्‍ति एक बार फिर बगावत पर उतर चुकी थी। 18 मार्च, 1974 से पटना में बिहार विधानसभा की बैठक शुरू होनी थी। तब तक 16 मार्च को बेतिया में आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस ने गोली चलाकर दो छात्रों की हत्‍या कर दी। आंदोलन की गति तीव्र हो गई। युवा शक्‍ति सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए संकल्‍पित हो चुकी थी। 18 मार्च को पटना में तोड़फोड़,आगजनी तथा हिंसा की ऐतिहासिक घटनाएं घटी।सर्चलाइट अखबार के प्रेस को असामाजिक तत्‍वों ने आग लगा दी। बिहार इस आंदोलन में धूं—धूं कर जलने लगा। छात्र-युवा शक्‍ति ने एकत्रित होकर सर्वोदयी नेता श्री जयप्रकाश नारायण को अपना नेता चुना और उन्‍हें आंदोलन की बागडोर सौंप दी।

गुजरात में छात्र-युवाआंदोलन के दबाव में चिमन भाई की सरकार के पतन से बिहार में आंदोलन को और बल मिला। मोतिहारी से नारा बुलंद हुआ –

बिहार भी गुजरात बनेगा-चम्‍पारण शुरूआत करेगा।

स्‍वस्‍फूर्त आंदोलन की गति जोर पकड़ते ही सरकार के दमनात्‍मक कार्यवाई से जेलों में जगह कम पड़ने लगी। जयप्रकाश के नेतृत्‍व ने आंदोलन को एक दिशा दी और विद्यालय-कॉलेजों के कमरे सूने होते चले गए। परीक्षा कॉपियों के पंख निकल आये। अब सड़कों पर उनका वजूद था। रेल की पटिरयां और बसें तो जैसे प्रतीक थे व्‍यवस्‍था को उलट पुलट देने के लिए।

छात्र-युवा शक्‍ति का स्‍वरूप इतना मजबूत होता चला जा रहा था कि राजनीतिक दलों के नेताओं का कद बौना बनने लगा था। फिर भी विपक्षी दलों के नेतागण इस आंदोलन में अपनी मौजुदगी का एहसास कराने में लगे थे। उस समय के नेता ठाकुर रमापति सिंह, विद्या कांत दूबे, नशीम अहमद, महेश्‍वरी साहू,संतसेवक प्रसाद, मोहनलाल मोदी, राय हरिशंकर शर्मा, प्रो. जनार्दन प्रसाद आदि नेताओं के साथ अपनी सक्रियता के इतिहास भुला नहीं सकता। कांग्रेसी व्‍यवस्‍था के खिलाफ जन-आंदोलन में छात्र आंदोलनकारियों के साथ तत्‍कालीन जनसंघ पार्टी के मुखर नेता राय हरिशंकर शर्मा को जिलाप्रशासन ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मोतिहारी जिला जेल जिसमें इतिहास के कई कालखंडों में अपनी गवाही दी है, एक बार फिर मोतिहारी की क्रांतिको पनाह दी।उस समय के नौजवानों के सीने में धधकती आग ने स्‍वतंत्रताकेबाद पहली बार जेल के चारदीवारी के भीतर इंकलाब ला दियाथा।

लोकप्रिय नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी उस समयसंसद में जनसंघ के नेता थे तथा पार्टी केएक शीर्ष और ठोस स्‍तम्‍भ थे।मोतिहारी में जनसभा करने का उनका कार्यक्रमबना।श्री वाजपेयी पार्टी के बिहार के शीर्ष नेता श्री कैलाशपति मिश्र के साथ पटना से 23 सितम्‍बर, 1974 को मोतिहारी दोपहर में पहुंचे। राजेंद्रनगर भवन के मैंदान में उनकी सभा थी।हम सभी कार्यकर्ताओं ने पार्टीनेताराय हरिशंकर शर्मा आदि नेताओं की गिरफ्तारी एवं आन्दोलन में शामिल लोगों पर हो रहे अत्याचारों की जानकारी वाजपेयी साहब को दी।उसे अटल जी ने बड़ी गंभीरता से सुना।उन्‍होंने श्रीशर्मातथा अन्‍य दलोंके जेल में बंद साथियों से मिलनेकी ईच्‍छा व्‍यक्‍त की तथा जेलगेट पर गए परंतु जेल अधीक्षक ने जिला पदाधिकारी से विचार विमर्श के बाद उन्‍हें बंदियों से नहीं मिलने दिया। वाजपेयी जी को यह बात खटक गई।

नगर भवन विशाल जनसभा को अपने जादुई अंदाज में संबोधित करते हुए उन्‍होंने शालीनता से इस घटना का खुलासा किया। नौजवान बौखला गये। श्री वाजपेयी ने कहा कि उनके सांसद होने के अधिकार से प्रशासन ने वंचित किया है। यह नियम विरूद्ध है। उन्होंने जनता को आह्वान किया कि वे जिला पदाधिकारी के आवास के सामने धरना देंगे और हजारों लोग पैदल सभा स्थल से जिला पदाधिकारी श्री विनय कुमार सिंह के आवास बाढ़ का पानी लांघने पहुंच गये। मंच बन गया। शाम के 7 बजे थे। जिलाधिकारी अभी बाढ़ भवन से वापस आये थे। स्थिति को भांपते हुए उन्होंने जेल से श्री राय हरिशंकर शर्मा को बुलाकर स्वयं उन्हें लेकर वाजपेयी जी को सौंप दिया। उपस्थित जनसमुदाय ने हर्ष ध्वनि की, नारेबाजी की परंतु वाजपेयी जी को श्री शर्मा के अलावा अन्य साथियों से मिले बिना चैन कहां था।

श्री वाजपेयी ने मंच से शेर सुनाया कि

     कैद मांगी थी-रिहाई तो नहीं मांगी थी।

     मैंने सिर्फ भेंट की इच्छा की थी, रिहाई की मांग नहीं की थी। हम जेल से नहीं डरते हैं।

24 सितम्बर, 1974 को सुबह 7 बजेश्री वाजपेयी जी के साथ श्री कैलाशपति मिश्र, स्थानीय पार्टी नेता राय हरिशंकर शर्मा, महेश्वर साहू एवं मैं जेल गेट पर पहुंचे। रात में ही यह तय हो चुका था। वाजपेयी जी जेल के भीतर गये, आन्दोलनकारी साथियों से मिले तथा उनका उत्साह बढ़ाया। अभी जेल के मुख्य द्वार तक आये ही थे कि तत्कालीन डी.एम.सी. ने उन्हें गिरफ्तारी का वारंट दिया तो वे मुस्कराने लगे। उन्होंने कहा कि जेल में तो मैं हूं ही। अब कहां ले चलोगे। गिरफ्तारी के वारंट की चर्चा सुनते ही मैं वहां से सीधे मोतिहारी शहर में आकर ध्वनि विस्तार यंत्र से मोतिहारी बंद का आह्वान करने लगा, टेलीफोन एक्चेंज पहुंचकर इसकी सूचना दिल्ली, पटना देना चाहते थेकिन्तु वहां केसारे कनेक्शन काट दिये गये थे। फिर भी मोतिहारी के डाकघर के तारबाबू श्री रामेश्वर जी के सहयोग से बेतार संदेश से मुजफ्फरपुर में संदेश भिजवा दिया। वहां निकलते वक्त मुझे एवं मेरे 3-4 साथियों को भी जीपगाड़ी में गिरफ्तार कर लिया।

सुबह 7 बजे मोतिहारी में श्री वाजपेयी की गिरफ्तारी की खबर दिल्ली में बिजली की तरह पहुंची। दिल्ली बंद हो गया। आकाशवाणी के 8 बजे के बुलिटन में यह समाचार मुख्य समाचारों में था। पूरा देश खासकर बिहार आन्दोलित हो उठा। चंपारण में आन्दोलनकारियों की गतिविधियों ने आम जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। पटना से मुख्यमंत्री सचिवालय ने श्री वाजपेयी, कैलाशपति मिश्र, राय हरिशंकर शर्मा आदि को सुरत हजारीबाग केन्द्रीय जेल भेजने का निर्देश दिया। श्री वाजपेयी को तीन दिन बाद संसदीय समिति के सदस्य के रूप में विदेश भ्रमण पर जाना था। केन्द्र सरकार ने आन्दोलन के रूख को देखते हुए बिहार सरकार को निर्देश दिया और हजारी बाग के रास्ते में से ही श्री वाजपेयी को चार घंटों में मुक्त कर दिया गया। उनके बाकी साथी हजारीबाग जेल भेज दिये गये और श्री वाजपेयी जी पटना के रास्ते दिल्ली रवाना हो गये।

आन्दोलन आगे बढ़ता गया, आपातकाल लगा, हटा किन्तु वाजपेयी जी की स्मृति और जेल यात्रा चंपारण के लाखों जनमानस में जो रची बसी वह आज भी तरोताजा है।

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